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खाटू श्याम मंदिर दर्शन के लिए जाते समय सड़क हादसे में जबलपुर की शिक्षिका सहित 5 लोगों की मौत, ट्रेलर में घुसी कार

नईदुनिया प्रतिनिधि, जबलपुर: राजस्थान में राष्ट्रीय राजमार्ग 52 पर शनिवार को सुबह दर्दनाक हादसे में एक कार में सवार शिक्षिका सहित पांच लोगों की मौत हो गई। सभी मृतक जबलपुर के रहने वाले थे। वे उज्जैन में महाकाल के दर्शन के बाद खाटू श्याम बाबा के मंदिर राजस्थान जा रहे थे। कोटा-जयपुर मार्ग पर सुबह लगभग साढ़े पांच बजे चाकमू के पास उनकी कार एक ट्रेलर में जा घुसी।

तेज टक्कर से कार क्षतिग्रस्त हो गई। शव उसके अंदर फंस गए थे। जिसे मशक्कर के बाद बाहर निकाला गया। कार चालक, शिक्षिका सहित तीन की मौक पर मौत हो गई। जबकि एक युवक ने अस्पताल ले जाते समय रास्ते में दम तोड़ा।

मृतकों में नक्षत्र नगर निवासी रेशमा श्रीवास्तव (55), सदर निवासी शानू सुकलवारे (25), माढ़ोताल के शंकर नगर निवासी पीयूष राय (26), कटंगी मार्ग के मदर टेरेसा नगर निवासी अनुराग रजक (24), और खेरमाई मंदिर के पास निवासी राहुल रजक शामिल है। घटना की सूचना मिलने पर मृतकों के स्वजन राजस्थान रवाना हो गए है। रविवार को शव शहर पहुंचेंगे।

गुरुवार को गए थे, रविवार को थी वापसी

रेशमा रेलवे सराय स्थित सरकारी स्कूल में शिक्षिका थी। वह धार्मिक प्रवृत्ति की थी। अक्सर तीर्थ यात्रा करती थी। उन्होंने महाकाल और खाटू श्याम बाबा की दर्शन की इच्छा स्वजन से जताई। मुंहबोले भतीजे शानू के साथ कार से उज्जैन और फिर राजस्थान जाने की योजना बनाई। शिक्षिका की कार अनुराग चलाता था। जब अनुराग को शिक्षिका ने धार्मिक यात्रा पर चलने की जानकारी दी तो उसने अपने दोस्त काे भी साथ ले चलने की इच्छा जताई।

इसमें अनुराग का एक दोस्त भी कार चलाना जानता था। वह पूर्व में शिक्षिका की कार चला चुका था। कार में सीट खाली थी और लंबी यात्रा थी, इसलिए शिक्षिका ने अनुराग को अपने दोस्तों को साथ ले जाने हामी भर दी। सभी लोग एक कार से गुरुवार को उज्जैन के लिए रवाना हुए। शुक्रवार को महाकाल के दर्शन के बाद खाटू श्याम बाबा के दर्शन करने जा रहा था। रास्ते में शनिवार को सुबह घटना हो गई। निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार रविवार को उनकी शहर वापसी थी। अब उसी दिन उनके शव शहर पहुंचेंगे।

सुबह सात बजे आया फोन, पसरा मातम

राजस्थान पुलिस का शनिवार को सुबह पीयूष के पिता राजेश राय के पास फोन आया। उन्होंने चाकमू के पास कार दुर्घटना में पीयूष और उसके साथ गए सभी लोगों की मौत होने की सूचना दी। यह सुनते ही पीयूष के घर पर मातम पसर गया।

धीरे-धीरे पीयूष के साथ कार में सवार अन्य मृतकों के स्वजन तक घटना की जानकारी पहुंची। दर्दनाक हादसे के बारे में पता चलते ही परिचित मृतकों के घर में जुटने लगे। उसके बाद मृतकों के स्वजन कुछ परिचितों के साथ कार से राजस्थान के लिए रवाना हो गए।

महाकाल मंदिर के बाहर ली अंतिम सेल्फी

सड़क दुर्घटना से पूर्व पीयूष और राहुल ने मोबाइल पर एक सेल्फी ली। यह सेल्फी दोनों ने उज्जैन में बाबा महाकाल के दर्शन के बाद ली। सेल्फी दोनों मित्र महाकाल मंदिर में नजर आ रहे है। उनकी यह सेल्फी जीवन का अंतिम छायाचित्र बन गई। इस सेल्फी को अपने इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर अपलोड करने के शहर में रहने वाले दोस्तों से फोन पर बात की। आगे खाटू श्याम बाबा के दर्शन के लिए जाना बताया। दोस्त उनकी सेल्फी को देखकर अभी तक विश्वास नहीं कर पा रहे है वह अब दुनिया में नहीं रहे।

एक घटना से बिखरी कई जिंदगियां...

गत वर्ष विवाह, दो माह बाद बनने वाले था पिता

अनुराग रजक निजी वाहन चालक था। उसकी गत वर्ष जनवरी में शादी हुई थी। दो माह बाद वह पिता बनने वाला था। वह घर नए मेहमान आने को लेकर काफी उत्साहित था। पत्नी साक्षी के साथ गत माह ही अपनी पहली वैवाहिक वर्षगांठ मनाया था। उसकी मौत का पता चलते ही गर्भवती पत्नी बेसुध हो गई। उसके अश्रुधारा थम नहीं रही थी। स्वजन ढांढस बंधा रहे थे, लेकिन वह बार-बार अनुराग का नाम पुकार रही थी।

अकेले रह गए पिता, पत्नी और दो छोटे बच्चे

राहुल रजक सब्जी बेचता था। उसके दो छोटे बच्चे है। बेटे बब्बू के अस्वस्थ्य होने पर पत्नी सपना और राहुल के पिता बब्लू उसे उपचार के लिए नागपुर लेकर गए थे। शुक्रवार की रात को नागपुर से वापस लौटकर पत्नी ने राहुल को फोन किया। राहुल ने बब्बू के स्वास्थ्य के बारे पूछा। बेटी से बात की। लेकिन तब नहीं पता था कि पिता से आखिरी बार बात हो रही है। उसकी मौत के बाद पिता, पत्नी और उसके बच्चे अकेले रह गए है।

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बेटियों को नहीं पता कि मां का साया छिन गया

रेशमा श्रीवास्तव के पति अखिलेश श्रीवास्तव भारतीय जीवन बीमा निगम से सेवानिवृत्त है। पत्नी की मौत की अचानक मौत की खबर से विचलित है। लेकिन गहरे आघात को छिपाएं हुए है। दंपती की दो बेटियां है, पलक (22) और पूजा (15)। दोनों को दोपहर तक पता नहीं था कि मां का साया उनके सिर से हमेशा के लिए छिन गया है। उन्हें दुर्घटना में मां के घायल होने की जानकारी थी।

शानू के जाने से परिवार का सहारा छिन गया

शानू की मौत की जानकारी जैसे ही घर तक पहुंची, उसकी मां बदहवास हो गई। वह एलआईसी में काम करते थे। पिता की मौत के बाद मां रेखा और छोटे भाई हर्ष सहित परिवार के पालन पोषण की जिम्मेदारी उस पर थी। उसकी असमय मौत ने परिवार का सहारा छीन लिया है। स्वजन ने सोचा नहीं था कि वह धार्मिक यात्रा से लौटकर ही नहीं आएगा।

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